एक इंस्पेक्टर
पुल-निर्माण की
जांच करने आया,
नदी पर तो नहीं
लेकिन ठेकेदार और इंजीनियर के बीच
उसने पुल बना हुआ पाया।
और पुल !
पुल भी बेहद मजबूत,
न कहीं टूट-फूट, न कहीं दरार
खुश इंजीनियर, खुश ठेकदार।
तो,
शाम के समय
जब इंस्पेक्टर कार्यालय पहुंचा,
आफिसर ने पूछा:
'क्या समाचार लाए?
बड़ी जल्दी लौट आए!'
इंस्पेक्टर बोला, 'सर,
हालात का क्या कहना है,
पुल नदीं पर नहीं
ठेकेदार और इंजीनियर के बीच बना है
सर घपला है
बहुत बडा घपला है
और मेरा अध्ययन तो
यह बताता है
सामान इधर से उधर जाता है
आफिसर ने पूछा:
'इसका प्रमाण?'
इंस्पेक्टर बोला, 'सर'
प्रमाण के रूप में
उनकी जीती-जागती संतान।
सर घपला है
इस बात की खबर
इनकी संतानों से ही मिलती है
क्योंकि,
ठेकेदार के बेटे की शक्ल
इंजीनियर से
और इंजीनियर के बेटे
की शक्ल
ठेकेदार से मिलती है। '
(अशोक चक्रधर/ यार सप्तक से साभार)