जुलाई 11, 2010

मुबारक हो धोनी

                          मुबारक हो धोनी








 अनुरोध भारद्वाज
शर्मीले महेन्‍द्र सिंह धोनी अब चपल और चंचल हो गए हैं, टीम इंडिया में शामिल होने से पहले उनका अंदाज ऐसा नहीं था. क्रिकेट की दीवानगी में किसे के भी बुलाने पर दूर कहीं शहर में चौके-छक्‍के बरसाने पहुंच जाते थे. क्रिकेट मैच के दौरान उनसे मेरी मुलाकात बरेली में हुई थी. हमारे एक मित्र हैं इंस्‍पेक्‍टर वीरेन्‍द्र सिंह यादव. उस समय बरेली के सीबीगंज थाने में एसओ थे. काल के निर्मम हाथों ने उनके इकलौते बेटे प्रशांत को छीन लिया था। जानलेवा कैंसर हुआ और लाख कोशिशों के बाद भी प्रशांत को बचाया नहीं जा सका। कुछ साल बाद इंस्‍पेक्‍टर यादव ने शहर में दिवंगत प्रशांत मैमोरियल क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन किया, दूर-दूर की टीमें बुलाईं, दिल्‍ली से भी खिलाड़ी बुलाए, धोनी उन दिनों घरेलू मैचों में धुआंधाड़ बल्‍ला घुमा रहे थे, समय का अभाव था मगर बरेली वालों ने बुलाया तो अजय जडेजा के साथ दौड़े चले आए, आधी रात को दिल्‍ली से रेल द्वारा बरेली पहुंचे, कुछ घंटे आराम के बाद सुबह स्‍पोर्ट स्‍टेडियम में मैच खेलने आ गए. मैच में जडेजा ने निराश किया मगर धोनी ने बल्‍ले से शमां बांध दिया, ताबड़तोड़ चालीस रन बनाए, उनकी इस पारी ने जडेजा के ग्‍लैमर को फीका कर दिया और लोग उनके दीवाने हो गए, मैच खत्‍म हुआ तो जडेजा के साथ धोनी ने मीडिया को हम सब को पूरा वक्‍त दिया, जो पूछा उसका सहज ढंग से जबाव दिया, कभी झेंपे तो कभी शरमाए, फिर हंसते हुए बरेली से विदा ले गए. कुछ ही दिन बाद खबर आ गई कि धोनी का चयन टीम इंडिया में हो गया है, इस खबर ने बरेली में मौजूद उनके फेन भी बहुत खुश हुए थे, पटाखे छोड़े थे, मिठाइयां बांटी थीं, उसके बाद से धोनी ने मुड़कर नहीं देखा है, अब वह किक्रेट की किताब के बहुत बड़ा नाम बन चुके हैं, इतने बड़े कि लोकप्रियता में पिछले तमाम क्रिकेटरों को पीछे छोड़ दिया है, कल के शर्मीले धोनी अब उतने ही चपल और चंचल धोनी बन चुके हैं, अब स्‍कूली मित्र दीक्षा से उन्‍होंने शादी कर ली है है। पुरानी एक मुलाकात की यादें ताजा हो गई हैं। सुखद दाम्‍पत्‍य जीवन की पहली सीढ़ी पर कदम रखने के लिए मेरे और मित्रों की ओर से उनको हार्दिक मुबारकबाद।