उन दिनों मैं अमर उजाला में था और वेदना-संवेदना में डूबी ये कहानी यूं ही मेरी खोज-खबर का हिस्सा बनी थी, एटा से आगरा, बरेली, पीलीभीत, गाजियाबाद-दिल्ली और नोएडा के बाद फिर बरेली का सफर तय करते हुए मैंने न जाने कितना लिखा है मगर एक दिन भटकते हुए बरेली पहुंची सगी बहनें सोनू-संजू के दर्द और उनके कहे-अनकहे एहसास वर्षों बाद भी नहीं भूल पाया हूं!
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